Saturday, March 7, 2009

हर चौराहे पर लाश

हर चौराहे पर लाश

यह मैं क्या देख रहा हूं? हर चौराहे पर लाश! चौंक गये, लेकिन यह सत्य है। जैसे जैसे होली नजदीक आ रही है हमें हर चौराहे पर हरे-भरे फलदार वृक्षों की लाश का ढेर दिखाई दे रहा है। ये वही वृक्ष हैं जिन्होंने हमें आजीवन प्राणवायु, फल, फूल और जीवनोपयोगी अन्य सामान दिये हैं। होली तो बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है फिर भारत में ये क्या हो रहा है। यह अत्यन्त निराशाजनक है कि हम बिना विचार किये ऐसा जघन्य पाप कर रहे है। कहीं ऐसा तो नहीं कि वृक्षों और खासकर हरे-भरे वृक्षों की कटाई कर हम अच्छाई पर बुराई की विजय का संदेश फैला रहे हैं। आज के समय जिस तरह नगरीकरण बढ़ रहा है और बड़े बड़े कंक्रीट जंगल तेजी से पनप रहे हैं ऐसे में शहरों में वृक्षों की संख्या पहले ही बहुत कम रह गयी है और ऐसे में यदि यही परम्परा चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जबकि हमारे वृक्ष खत्म हो जायेंगे और हमारे पास जमीन भी नहीं बचेगी कि हम नये वृक्ष लगा सकें। हमें इस बारे में विचार करना होगा और ऐसी परम्परा विकसित करनी होगी जो कि प्रतिवर्ष हरे-भरे वृक्षों को होली का निशाना बनने से बचा सकें।

2 comments:

हिमांशु । Himanshu said...

कौन-कौन से पेड़ों की लाश दिखायी दे रही है ? होली में तो कुछ खास पेड़ों को ही काटने और जलाने का रिवाज है ।
धन्यवाद इस पोस्ट के लिये ।

आपकी पोस्ट और आपके किये गये विभिन्न ब्लोगों पर कमेंट देख कर मैं तो हैरत में पड़ गया कि यह सब कुछ मैंने कब कर दिया !

हम दोनों समान नाम के जो हैं . स्वागत है, हिमांशु पाण्डेय का.
लग रहा है, अपना ही स्वागत कर रहा हूं ।

हिमांशु । Himanshu said...

कभी मेरे ब्लोग पर भी आइये - स्वागत है ।

सच्चा शरणम